गृहिणी

जो बिखरे हुए को साथ लाती है,

जो रोज़ खुद भूखी रहकर हमारे पेट भरती है,

जो हर मुश्किल को आसान बनाती है,

कभी वह बहु, तो कभी माँ कहलाती है।

नहीं पूछता उसे कोई,

कब वह जागी और कब वह सोई।

काम तो तब होता है जब बाहर जाओ पहनकर शर्ट और टाई,

पर उसका काम, काम कहाँ कहलाता है?

जहाँ न हो कोई छुट्टी, और ना ही कोई कमाई....