गांधीजी से मिली प्रेरणा

लड़ी जिसने हमारी लिए अहिंसा की जंग,

चला गया वो दूर हमसे लगाकर आज़ादी के पंख,

बुरा न बोलो, ना देखो, ना सुनो थे उसके तीन बंदर,

जो बसाने हैं हमें अपने अंदर।

खाई उन्होंने जेल में बहुत सारी लाठी,

फिर चरखे का महत्व बताकर सिखाई बनानी खादी,

डांडी मार्च का सत्याग्रह कर नमक क़ानून तोड़ा,

असहयोग आन्दोलन के कारण अंग्रेजों ने भारत छोड़ा।

सच्चाई के पथ पर चलना सिखाया,

अहिंसा का मूल भी बतलाया,

अछूत और दलित थे उनके हरिजन,

बन गए वो उनके प्रियजन।

सत्य अहिंसा से जीती पारी,

एक बार फिर सच्चाई पड़ी बुराई पर भारी,

अब जान गई है ये दुनिया सारी,

की यही तालीम हमेशा रहेगी जारी।

मैं भी हूँ उनकी भक्त,

और आ गया है वो वक़्त,

जब पूरी दुनिया एक हो, करे उसका अनुसरण,

और उनके गीत गाकर,

करें उन्हें शत-शत नमन, शत-शत नमन, शत-शत नमन....