अविस्मरणीय बलिदान

अपनी जान त्याग देते हैं वे शूरवीर,

रोज़ हमारे लिए वे मरकर भी जीते हैं,

फिर छोड़ जाते हैं हमारे लिए उनकी अस्थियाँ,

जो हमारे लिए प्रशासन से कम नहीं।

हमारा तिरंगा है उनकी जान,

वे हैं भारत कि आन और बान,

उनके जैसे और कितने सिपाही होते हैं हमारे लिए क़ुर्बान,

जो अपनी जान न्योछावर कर,

बन जाते हैं इस देश की शान।

अपनी जान त्याग देते हैं वो... वो शूरवीर,

वे मरते नहीं,

अमर होते हैं।