दिल का हाल

क्या बताए दिल का हाल,’

दिल अभी अजीब सा है,

ज़िंदगी की परवाह वैसे तो नहीं थी,

पर मौत का खयाल अब करीब सा है।

किस्से तो रोज़ ही सुनते थे,

सच्चाई पहली बार सुनी,

बातें तो रोज़ दम की होती थी,

आखिर राह आसान चुनी।

जिन बातों को मन में बंद किया,

वो सिर्फ सपनों में बाहर आई,

इस खुले आसमान में भी,’

कैसी ये ढूंढ छाई ?

क्या बताएं दिल का हाल,

दिल अभी अजीब सा है,

ज़िंदगी की परवाह वैसे तो नहीं थी,

पर मौत का खयाल अब करीब सा है।